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अपने बच्चों को पाकर चिंघाड़ उठी हथिनी।

 

उफनती तीस्ता के भयंकर धारा में तीन-चार दिन का हस्ती सावक अपनी प्राण बचाने के लिए लहरों से लड़ रहा था। यह देखकर अपनी जान की परवाह किए बिना मछुआरे नाव लेकर हाथी के बच्चे की तरफ बढ़े और उसे बचा लिए। बच्चें को बचाने वाले अजय दास, बाबलू दास, गोपाल दास, मिठू दास और विश्वनाथ दास आज समाज के नजरों में हीरो है। घटना की खबर पाकर बैकुंठपुर फॉरेस्ट डिविजन हरकत में आई। उन्होंने हथिनी के बच्चे को उसके मां के पास लौटा दिया। पानी में बह गए अपने बच्चें को देखकर हथिनी चिंघाड़ पड़ी।