हिन्दी दिवस और पखवाड़ा के उपलक्ष्य में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास(भारतीय भाषा मंच), कांचरापाड़ा कॉलेज एवं हिन्दी साहित्य भारती, उत्तर 24 परगना इकाई के संयुक्त तत्वावधान में “संपर्क भाषा के रूप में हिन्दी: चुनौतियाँ और सम्भावनाएँ” विषय पर एक बौद्धिक संगोष्ठी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का आरंभ प्राचार्य महोदय, अतिथियों एवं वक्ताओं द्वारा मां सरस्वती, मां भारती और मां भारती के भूमिपुत्र श्यामा प्रसाद मुखर्जी के छायाचित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित करके एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। कार्यक्रम के प्रेरणा स्रोत कांचरापाड़ा कॉलेज के प्राचार्य श्री प्रणव कुमार रहें। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे गैर-हिन्दी भाषी राज्य में हिन्दी को थोपने की नहीं, बल्कि जोड़ने की भाषा के रूप में देखना चाहिए। वक्ता के रूप में उपस्थित शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रो० रंजीत प्रसाद ने कहां की तमाम भारतीय भाषाओं को जड़ों से जोड़कर रखने का काम हिंदी करती है।
उपस्थित अतिथि भैरव गांगुली कॉलेज के प्राचार्य प्रो० शुभोनील सोम ने हिन्दी के सामने तकनीक और बाजारवाद की चुनौती पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अधिकारी एवं हिन्दी साहित्य भारती के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ० राम निवास शुक्ल ने कहा कि सरकारी कामकाज में हिन्दी का प्रयोग बढ़ रहा है और यह अब केवल अनुवाद की भाषा नहीं रही। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की प्रांत संयोजिका (पश्चिम बंगाल)डॉ०शुचेता मुखोपाध्याय ने हिंदी के राष्ट्रीय स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम की संयोजिका कॉलेज के हिंदी विभाग की पूर्व विभागाध्यक्षा एवं ABRSM की कन्वेनर डॉ० सुनीता मंडल ने कहा कि आज के युवा को रोजगार की भाषा के रूप में हिन्दी की आवश्यकता है।
